Khagras Chandragrahan Rashi खग्रास चन्द्रग्रहण का राशियों पर प्रभाव


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ग्रहण की पौराणिक कथा

पौराणिक कथा के अनुसार ऐसा कहा जाता है कि समुद्र मंथन से उत्पन्न अमृत को दानवों ने देवताओं से छीन लिया। इस दौरान भगवान विष्णु ने मोहिनी नामक सुंदर कन्या का रूप धारण करके दानवों से अमृत ले लिया और उसे देवताओं में बांटने लगे, लेकिन भगवान विष्णु की इस चाल को राहु नामक असुर समझ गया और वह देव रूप धारण कर देवताओं के बीच बैठ गया। जैसे ही राहु ने अमृतपान किया, उसी समय सूर्य और चंद्रमा ने उसका भांडा फोड़ दिया। उसके बाद भगवान विष्णु ने सुदर्शन च्रक से राहु की गर्दन को उसके धड़ से अलग कर दिया। अमृत के प्रभाव से उसकी मृत्यु नहीं हुई इसलिए उसका सिर व धड़ राहु और केतु छायाग्रह के नाम से सौर मंडल में स्थापित हो गए। माना जाता है कि राहु और केतु इस बैर के कारण से सूर्य और चंद्रमा को ग्रहण के रूप में शापित करते हैं। हिंदू धर्म में ग्रहण को मानव समुदाय के लिए हानिकारक माना गया है। जिस नक्षत्र और राशि में ग्रहण लगता है उससे जुड़े लोगों पर ग्रहण के नकारात्मक प्रभाव पड़ते हैं। हालांकि ग्रहण के दौरान मंत्र जाप व कुछ जरूरी सावधानी अपनाकर इसके दुष्प्रभावों से बचा जा सकता है।

इस साल का दूसरा चंद्रग्रहण गुरु पूर्णिमा यानी 27 जुलाई (शुक्रवार) को होगा। यह सदी का सबसे लंबा चंद्र ग्रहण होगा और पूरे भारत में दिखाई देगा। ग्रहण रात 11:54 से शुरू होकर रात 3:49 बजे समाप्त होगा। 3 घंटे 55 मिनट चलने वाला यह ग्रहण आसानी से बिना किसी उपकरण की सहायता से देखा जा सकेगा। इस दिन गुरू पूर्णिमा होने के कारण पूजा ग्रहण के सूतक काल लगने से पहले की जा सकती है।  चंद्र ग्रहण से पहले सूतक दोपहर 2 बजे से शुरू हो जाएंगे। ज्योतिषियों की मानें तो चंद्रग्रहण के समय माना जाता है कि भोजन करने से बचना चाहिए। वहीं, सुईं और नुकीली चीजों को भी इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।

जानिए कब होता है

चंद्रग्रहण तब होता है जब सूरज व चांद के मध्य में धरती आ जाती है। इसके बाद पृथ्वी की वजह से चांद पर पड़ने वाली सूरज की रोशनी रुक जाती है। इसी को चंद्रग्रहण कहते हैं। 

इन देशों में भी दिखेगा चंद्र ग्रहण

इस पूर्ण चंद्र ग्रहण का नजारा भारत समेत दुबई, अफ्रीका, मिडिल ईस्‍ट और दक्षिण एशिया में खुली आंखों से देखा जा सकेगा.

इस बार 27 जुलाई 2018 को होने वाले चंद्र ग्रहण के दौरान बेहद खास योग बन रहा है। इस दौरान केमद्रुम योग बन रहा है। यह योग किसी जातक को महा दरिद्र बना सकता है तो किसी को राजयोग भी दिला सकता है। खास बात यह है कि यह योग जन्मपत्रिका में बैठे ग्रह-नक्षत्रों के आधार पर फल देता है। 

ज्योतिष के अनुसार जहां कुछ योग जातक को पूरी तरह से कंगाल और दरिद्र बना देते हैं, वहीं केमद्रुम योग वाला जातक राजयोग का सुख भोगने वाला भी हो सकता है। यदि कुंडली में केमद्रुम योग की सृष्टि होने के साथ ही उसके भंग होने की भी स्थितियां मौजूद हों, तो जातक विशेष राजयोग से संपन्न हो जाता है।

क्या है केमद्रुम योग ?

जब भी चंद्रमा किसी भी भाव में बिल्कुल अकेला होता है और उसके अगल-बगल के दोनों अन्य भावों में कोई ग्रह नहीं होते, तो ऐसी स्थिति में केमद्रुम योग की सृष्टि होती है। परंतु इस तरह के केमद्रुम योग को बर्दाश्त किया जा सकता है क्योंकि ऐसी दशा में ग्रह शांति और कुछ उपायों के पश्चात जातक कंगाली से उबर भी सकता है।

प्रबल केमद्रुम योग

परंतु जब ऐसे चंद्रमा को कोई शुभ ग्रह भी न देख रहे हों, वह स्वयं पापी, क्षीण अथवा नीचस्तंगत हो तथा पापी व क्रूर ग्रहों द्वारा देखा भी जा रहा हो तो ऐसे में स्पष्ट रूप से प्रबलतम केमद्रुम योग की सृष्टि होती है। इस दशा में व्यक्ति को भीख मांग कर खाने की भी स्थिति आ जाती है। ऐसे योग वाला जातक जीवन भर कंगाल ही रह जाता है। 

प्रबल दारिद्रय योग या महा दारिद्रय योग में अशुभ असर कम करने के लिए कुछ विशेष उपाय बताए गए हैं, जो इस प्रकार है : - 

दक्षिणावर्ती शंख के जल से मां लक्ष्मी की मूर्ति को स्नान कराएं।

चांदी के श्रीयंत्र में मोती जड़वा कर लॉकेट धारण करें।

रूद्राक्ष की माला से शिवपंचाक्षरी मंत्र 'ॐ नम: शिवाय' का जप करने से केमद्रुम योग के अशुभ फल कम होते हैं।

शिव और लक्ष्मी की स्तुति इसमें विशेष तौर पर फायदेमंद होती हैं।

सोमवार की पूर्णिमा के दिन या सोमवार को चित्रा नक्षत्र से लगातार चार वर्ष तक पूर्णिमा का व्रत रखें।

महामृत्युंजय मंत्र का जाप प्रतिदिन 108 बार अवश्य करें।

सोमवार के दिन शिवलिंग पर गाय का कच्चा दूध चढ़ाएं।

सिद्ध कुंजिकास्तोत्रम का प्रतिदिन 11 बार तेज स्वर में पाठ करें।

रोजाना शिव तथा पार्वती की पूजा-उपासना करें।

घर में दक्षिणावर्ती शंख स्थापित करें। इसके सम्मुख प्रतिदिन श्रीसूक्त का पाठ करें।

इस खग्रास चन्द्रग्रहण का राशियों पर प्रभाव निम्न रहेगा-

* शुभफलदायक-मेष, सिंह, वृश्चिक, मीन

* मध्यमफलदायक-वृषभ, कर्क, कन्या, धनु

* अशुभ फलदायक-मिथुन, तुला, मकर, कुंभ

अत: वृषभ, कर्क, कन्या, धनु, मिथुन, तुला, मकर, कुंभ राशिवाले जातकों को ग्रहण के दर्शन करना शुभ नहीं रहेगा।

यह खग्रास चन्द्रग्रहण मकर राशि पर मान्य है इसलिए मकर राशिवाले जातकों को यह ग्रहण विशेष रूप से अनिष्ट फलदायक रहेगा। ग्रहण अवधि में घर रहकर अपने ईष्टदेव का पूजन, जप, तप, आराधन करना श्रेयस्कर रहेगा।

मिथुन, तुला, मकर, कुंभ राशिवालों को नीचे दी गई वस्तुओं का दान करना लाभप्रद रहेगा-

मिथुन-हरे वस्त्र, मूंग, हरे फ़ल, कांसा, धार्मिक पुस्तकें इत्यादि।

तुला-श्वेत वस्त्र, सौंदर्य सामग्री, चांदी, चावल, दूध-दही, शकर, घी, सफ़ेद फूल इत्यादि।

मकर-काला वस्त्र, उड़द, काले-तिल, सुगन्धित तेल, छाता, कम्बल इत्यादि।

कुंभ-नीला वस्त्र, कोयला, चमड़े के जूते, लोहा, सरसों का तेल, इमरती इत्यादि।