गुरु पूर्णिमा के दिन क्या करें ?
गुरु पूर्णिमा का पावन पर्व हिंदू संस्कृति में गुरु के प्रति सम्मान, कृतज्ञता और समर्पण व्यक्त करने का सबसे बड़ा दिन माना जाता है. आषाढ़ मास की पूर्णिमा को महर्षि वेदव्यास जी के जन्मोत्सव (व्यास पूर्णिमा) के रूप में भी मनाया जाता है.इस पवित्र दिन पर आध्यात्मिक और मानसिक उन्नति के लिए शास्त्रों में कुछ विशेष नियम बताए गए हैं.
गुरु के दर्शन और आशीर्वाद लें: यदि आपके आध्यात्मिक गुरु हैं, तो उनके आश्रम या निवास पर जाकर उनके चरण स्पर्श करें और आशीर्वाद लें.
मानसिक पूजन करें: यदि गुरु के पास जाना संभव न हो, तो घर पर ही उनकी तस्वीर के सामने दीपक जलाकर मानसिक रूप से उन्हें प्रणाम करें.
माता-पिता और शिक्षकों का सम्मान करें: शास्त्रों में माता-पिता को प्रथम गुरु माना गया है, इसलिए इस दिन माता-पिता, बुजुर्गों और शिक्षकों का आशीर्वाद जरूर लें.
भगवान विष्णु और शिव की पूजा: इस दिन भगवान विष्णु, श्रीकृष्ण या भगवान शिव की विशेष पूजा-अर्चना करें. यदि आपका कोई गुरु नहीं है, तो आप भगवान शिव या श्रीकृष्ण को अपना गुरु मानकर उनकी पूजा कर सकते हैं.
मंत्र जाप और साधना: अपने गुरु द्वारा दिए गए गुरु मंत्र का कम से कम 108 बार या अपनी श्रद्धा अनुसार जाप करें. आप “ॐ बृं बृहस्पतये नमः” या “ॐ गुरवे नमः” का जाप भी कर सकते हैं.
पीली वस्तुओं का दान: इस दिन जरूरतमंदों को धार्मिक पुस्तकें, पेन-पेंसिल, पीले वस्त्र, चने की दाल, हल्दी या फल दान करने से गुरु ग्रह (बृहस्पति) मजबूत होता है और करियर में तरक्की मिलती है.
सात्विक भोजन और व्रत: इस दिन मन को निर्मल रखने के लिए व्रत या उपवास रखें और बिना प्याज-लहसुन का शुद्ध सात्विक भोजन ग्रहण करें.