Skip to main content

Neptunejyotish

श्रावण मास में शिव की विशेष पूजा

श्रावण मास हिंदू पंचांग का पाँचवा और सबसे पवित्र महीना माना जाता है, जो मुख्य रूप से भगवान शिव की विशेष पूजा और आराधना के लिए समर्पित है। धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से इस महीने का बहुत अधिक महत्व है।

शिवजी को प्रसन्न करने के लिए शिवलिंग पर गंगाजल, दूध, बेलपत्र, धतूरा, भांग और चंदन अर्पित किया जाता है।

पौराणिक कथाओं के अनुसार, इसी महीने में समुद्र मंथन के दौरान निकले हलाहल विष को भगवान शिव ने सृष्टि की रक्षा के लिए अपने कंठ में धारण किया था। विष की जलन को शांत करने के लिए देवताओं ने उन पर जल अर्पित किया था, इसलिए सावन में जल चढ़ाने की विशेष परंपरा है।

गन्ने का रस: आर्थिक तंगी को दूर करने और जीवन में धन-समृद्धि बढ़ाने के लिए।
कच्चा दूध और शहद: यदि परिवार में कोई लंबे समय से बीमार है, तो उत्तम स्वास्थ्य और लंबी आयु के लिए।
इत्र मिश्रित जल: मानसिक तनाव को कम करने, मन की शांति और सुख-सुविधाओं की प्राप्ति के लिए।
शुद्ध घी: शारीरिक कमजोरी को दूर करने और वंश वृद्धि (संतान सुख) के लिए।
केसर मिश्रित जल: नौकरी, व्यापार में उन्नति और समाज में मान-सम्मान पाने के लिए।

मनोकामना पूर्ति बेलपत्र: 21 या 108 बेलपत्रों पर चंदन से ‘राम’ या ‘ॐ नमः शिवाय’ लिखकर शिवलिंग पर अर्पित करें।
विवाह में बाधा दूर करने के लिए: सावन के किसी भी दिन या सोमवार को शिवलिंग पर केसर मिला हुआ दूध चढ़ाएं और माता पार्वती को श्रृंगार की सामग्री अर्पित करें।
ग्रह दोष (काल्सर्प या राहु-केतु) शांति: सावन के सोमवार को जल में काले तिल मिलाकर शिवलिंग पर चढ़ाएं और ‘ॐ नमः शिवाय’ का 108 बार जाप करें।
रुद्राक्ष धारण प्रयोग: यदि आप जीवन में सकारात्मक बदलाव चाहते हैं, तो सावन के किसी भी सोमवार को सिद्ध किया हुआ रुद्राक्ष धारण करना सर्वोत्तम माना जाता है।


विशेष चमत्कारी मंत्र
महामृत्युंजय मंत्र: ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्व्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥
शिव गायत्री मंत्र: ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि तन्नो रुद्रः प्रचोदयात्॥
पंचाक्षरी मंत्र: ॐ नमः शिवाय

Add Your Heading Text Here

Lorem ipsum dolor sit amet, consectetur adipiscing elit. Ut elit tellus, luctus nec ullamcorper mattis, pulvinar dapibus leo.