12 साल बाद गुरु का सिंह राशि में महागोचर का क्या प्रभाव होता है?
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, देवगुरु बृहस्पति आज यानी 31 अक्टूबर 2026, शनिवार को दोपहर 01:10 बजे कर्क राशि से निकलकर सिंह राशि में प्रवेश कर रहे हैं। गुरु का यह महागोचर मुख्य रूप से 24-25 जनवरी 2027 तक सिंह राशि में रहेगा, जिसके बाद वे वक्री होकर दोबारा कर्क राशि में लौटेंगे।
• परेशानियों से मुक्ति: पिछले कई महीनों से आप जिस मानसिक तनाव या समस्याओं से जूझ रहे थे, उनसे छुटकारा मिलेगा। सुख-समृद्धि और उन्नति के नए द्वार खुलेंगे।
• करियर और शिक्षा: नौकरी और बिजनेस में बड़ी सफलता या कोई अटकी हुई डील फाइनल हो सकती है। विद्यार्थियों के लिए उच्च शिक्षा या रिसर्च वर्क में सफलता के मजबूत योग हैं।
• विवाह योग: जिन जातकों के विवाह की बातचीत चल रही है, उनका रिश्ता इस दौरान तय हो सकता है।
• सावधानी: सेहत के मामले में लापरवाही न बरतें। फैटी लिवर, पेट की दिक्कतें और वजन बढ़ने जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
• धार्मिक उत्सव और तीर्थाटन: देश में धार्मिक उत्सव बहुत ही श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाए जाएंगे। विद्वानों का सम्मान बढ़ेगा और तीर्थस्थलों पर यात्रियों की संख्या में बड़ी वृद्धि होगी।
• बाजार और निवेश: स्टील और तांबे में निवेश करने से फायदा मिल सकता है, लेकिन चांदी और शेयर बाजार में भारी उतार-चढ़ाव रहने के कारण बहुत सोच-समझकर कदम उठाना होगा। कारोबारियों के लिए समय मुनाफे वाला रहेगा।
• राजनीति व मौसम: राजनीतिक दलों और सरकार के बीच मतभेद या खींचतान बढ़ सकती है। साथ ही, मौसम में अचानक बदलाव या बेमौसम बारिश के कारण कृषि क्षेत्र में कुछ दिक्कतें और लोगों को स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां झेलनी पड़ सकती हैं।
1. पहला चरण (अल्पकालिक): गुरु 31 अक्टूबर 2026 को सिंह राशि में प्रवेश कर रहे हैं। इसके बाद 13 दिसम्बर 2026 को यह सिंह राशि में वक्री (उल्टी चाल) हो जाएंगे।
2. कर्क में वापसी: वक्री अवस्था में चलते हुए गुरु 25 जनवरी 2027 को पुनः पिछली राशि कर्क में लौट आएंगे।
3. दूसरा चरण (दीर्घकालिक): कर्क राशि में मार्गी होने के बाद, गुरु 26 जून 2027 को दोबारा सिंह राशि में प्रवेश करेंगे और फिर वहां लंबे समय के लिए स्थिर रहेंगे।