Skip to main content

Neptunejyotish

कर्म का सबसे बड़ा रहस्य श्रीकृष्ण ने अर्जुन को समझाया


एक दिन अर्जुन ने श्रीकृष्ण से पूछा
“माधव, एक बात मेरी समझ में नहीं आती। कोई व्यक्ति जीवनभर अच्छे कर्म करता है, फिर भी उसे दुख क्यों मिलता है? और कोई गलत कर्म करके भी सुखी दिखाई देता है ?”
श्रीकृष्ण मुस्कुराए और बोले—
“पार्थ, तुम खेत में बीज बोने वाले किसान को देखते हो?”
अर्जुन ने कहा, “हाँ, केशव!”
श्रीकृष्ण बोले—
“यदि किसान आज बीज बोए और कल ही फल माँगने लगे, तो क्या उसे फल मिल जाएगा?”
अर्जुन ने कहा, “नहीं प्रभु, उसे धैर्य रखना होगा। बीज को वृक्ष बनने में समय लगता है।”
तब श्रीकृष्ण ने समझाया—
“ठीक उसी प्रकार, मनुष्य के कर्मों का परिणाम भी हमेशा तुरंत दिखाई नहीं देता। किसी को अपने कर्मों का फल जल्दी मिलता है, किसी को देर से। लेकिन केवल आज किसी के सुख या दुख को देखकर उसके पूरे जीवन का हिसाब नहीं समझा जा सकता।”
अर्जुन ध्यान से सुनने लगे।
श्रीकृष्ण आगे बोले—
“पार्थ, तुम्हारे हाथ में कर्म करना है, लेकिन हर परिणाम को अपनी इच्छा के अनुसार नियंत्रित करना तुम्हारे हाथ में नहीं है।
इसलिए अच्छे कर्म केवल इस उम्मीद में मत करो कि तुम्हें तुरंत अच्छा फल मिलेगा। अच्छे कर्म इसलिए करो क्योंकि सत्य, धर्म और करुणा का मार्ग ही तुम्हें भीतर से मजबूत बनाता है।
दूसरों के कर्म देखकर अपने धर्म से मत डगमगाना।
किसी का बुरा करके आगे बढ़ने से अच्छा है कि तुम सच्चाई के साथ धीरे-धीरे आगे बढ़ो।
याद रखना, **दूसरों के हिस्से का फल देखकर अपने कर्मों पर संदेह मत करना। अपने कर्मों की शुद्धता पर ध्यान देना।**”
अर्जुन ने पूछा, “और यदि सच्चे कर्म करने के बाद भी असफलता मिले, तो क्या करना चाहिए, माधव?”
श्रीकृष्ण ने प्रेम से कहा—
“पार्थ, असफलता तुम्हारे प्रयास का अंत नहीं, तुम्हारे सीखने का अवसर भी हो सकती है। अपनी भूलों से सीखो, अपना कर्तव्य निभाओ और फिर से प्रयास करो।
कर्म तुम्हारा अधिकार है, फल की चिंता में अपने कर्तव्य से पीछे हट जाना तुम्हारी सबसे बड़ी भूल है।”
अर्जुन के मन का संशय दूर हो गया। उन्होंने समझ लिया कि जीवन का उद्देश्य केवल फल पाना नहीं, बल्कि सही मार्ग पर चलते हुए अपना कर्तव्य निभाना भी है।
🌺 आज की सीख 🌺
किसी के जीवन से अपनी तुलना मत करो।
किसी की सफलता देखकर निराश मत हो।
और अपने अच्छे कर्मों का परिणाम देर से मिलने पर भगवान से शिकायत मत करो।
तुम अपना कर्म सच्चे मन से करते रहो, फल की चिंता छोड़कर अपना कर्तव्य निभाते रहो।
क्योंकि जीवन में सबसे बड़ी जीत केवल सफलता पाना नहीं, बल्कि सफलता और असफलता—दोनों में अपने धर्म और अच्छे संस्कारों को बनाए रखना है।

Add Your Heading Text Here

Lorem ipsum dolor sit amet, consectetur adipiscing elit. Ut elit tellus, luctus nec ullamcorper mattis, pulvinar dapibus leo.